राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जीवन परिचय – भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति चुना जाना, कभी बच्चों को पढ़ाया करती थीं द्रौपदी मुर्मू ..

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20 जून 1958 को जन्म लेने वालीं द्रौपदी मुर्मू भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अनोखी लिस्ट में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने आजादी के बाद जन्म लिया और वर्तमान में देश के दोनों शीर्ष पदों पर 1947 के बाद के पैदा हुए नेताओं का कब्जा हो गया है.

नाम (Name)द्रौपदी मुर्मू
जन्म तारीख (Date of birth)20 जून 1958
उम्र( Age)64 साल (2022 में )
जन्म स्थान (Place of born )मयूरभंज, उड़ीसा, भारत
शिक्षा (Education )कला स्नातक
स्कूल (School )ज्ञात नहीं
कॉलेज (College )रमा देवी महिला कॉलेज,
भुवनेश्वर, ओडिशा
राशि (Zodiac Sign)मिथुन राशि
गृहनगर (Hometown)मयूरभंज, उड़ीसा, भारत
नागरिकता(Nationality)भारतीय
धर्म (Religion)हिन्दू
जाति (Cast )अनुसूचित जनजाति
राजनीतिक दल (Political Party)भारतीय जनता पार्टी
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)  विधवा
संपत्ति (Net Worth )रु 9.5 लाख

द्रौपदी भुवनेश्वर पढ़ने गईं। उस समय अपने गांव उपरवाड़ा से भुवनेश्वर जाकर पढ़ाई करने वाली वह इकलौती लड़की थीं। वह पढ़ाई में अव्वल थीं। उन्हीं दिनों श्याम चरण मुर्मू से उनकी मुलाकात हुई। वह भी भुवनेश्वर के एक कॉलेज से पढ़ाई कर रहे थे। श्याम के परिजन 1980 में द्रौपदी के घर शादी का प्रस्ताव लेकर गए। श्याम के घरवाले तीन-चार दिन उपरवाड़ा गांव में ही टिके रहे। देर से ही सही, काफी मनाने पर घरवाले मान गए। द्रौपदी को मायके से तब एक गाय और बैल भी उपहार में मिला था।

द्रौपदी मुर्मू कौन हैं?
राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले मतदान में एनडीए की ओर से द्रौपदी मुर्मू का नाम दिया गया है। द्रौपदी मुर्मू उड़ीसा की आदिवासी महिला नेता हैं और झारखंड की गवर्नर रह चुकी हैं।

द्रोपदी मुर्मू का परिवारिक परिचय

द्रौपदी मुर्मूजी के पिता का नाम बीरांची नारायण टूडू है तथा संताल आदिवासी फैमिली से संबंध रखते हैं झारखंड राज्य बनने के उपरांत लगातार पांच साल झारखंड राज्य की पहली महिला राज्यपाल है इनके पति का नाम श्याम चरण मुर्मू है | तथा इनकी पुत्री का नाम इतिश्री मुर्मू है |

द्रौपदी मुर्मू का करियर (Career )

उन्होंने रायरंगपुर में श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में एक सहायक शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। इसके बाद, उन्होंने सिंचाई और बिजली विभाग के हिस्से के रूप में ओडिशा सरकार के साथ काम किया।

मुर्मू के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1997 में हुई जब उन्होंने पार्षद के रूप में स्थानीय चुनाव जीते। उसी वर्ष, वह भाजपा के एसटी मोर्चा की राज्य उपाध्यक्ष बनीं। 

भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर मुर्मू ने रायरंगपुर सीट से दो बार जीत हासिल की, 2000 में ओडिशा सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनी ।

ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान, वह 6 मार्च, 2000 से 6 अगस्त, 2002 तक वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार मंत्री रही।

साल 2007 में मुर्मू को संयोग से ओडिशा विधानसभा द्वारा वर्ष का सर्वश्रेष्ठ विधायक होने के लिए सम्मानित किया गया था।

अगले एक दशक में उन्होंने भाजपा के भीतर कई प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं, एसटी मोर्चा के राज्य अध्यक्ष और मयूरभान के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

6 अगस्त, 2002 से मई 16, 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री थीं।

ओडिशा की विधान सभा ने उन्हें वर्ष 2007 के सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए “नीलकंठ पुरस्कार” से सम्मानित किया।

उन्हें 2013 में मयूरभंज जिले के लिए पार्टी के जिला अध्यक्ष पद के लिए पदोन्नत किया गया था।

मई 2015 में, भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें झारखंड के राज्यपाल के रूप में चुना। वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल हैं। वह ओडिशा की पहली महिला और आदिवासी नेता हैं जिन्हें भारतीय राज्य में राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

राष्ट्रपति चुनाव के मतदान में वह भारत की 15वी राष्ट्रपति घोषित की गईं।

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